एक सोच बुजुर्गों केलिए
जिनसे हे पहचान हमारी
जिन्हें सींचा जीवन हमारा i
बने लाटीउनकी हम
करें फलाई उनकी हमेशा iI
ममता की आँचल में पाला माँ ने
उंगली पकड़कर साथ दिया पिता ने,
करके रात -दिन ऐसी सेवा
जिनसे हे पहचान हमारी
जिन्हें सींचा जीवन हमारा i
बने लाटीउनकी हम
करें फलाई उनकी हमेशा iI
ममता की आँचल में पाला माँ ने
उंगली पकड़कर साथ दिया पिता ने,
करके रात -दिन ऐसी सेवा
हमको सुलाया खुद जागकरI
साथ निभाया शक्ती बनकर
कुछ न चाहा बदले मेंI
सेवा उनकी करें ऐसी
धन्य हो जाय जीवन उनकीI
ज़िन्दगी की सायंकाल में
आराम देना छाया बनकरII
आज यह है ,कल हमें भी
गुज़रना है इस डगर सेI
तुम समझें जी बात इतनी सी
जाग जाएँ तुम वक्त रहते हीII
साथ निभाया शक्ती बनकर
कुछ न चाहा बदले मेंI
सेवा उनकी करें ऐसी
धन्य हो जाय जीवन उनकीI
ज़िन्दगी की सायंकाल में
आराम देना छाया बनकरII
आज यह है ,कल हमें भी
गुज़रना है इस डगर सेI
तुम समझें जी बात इतनी सी
जाग जाएँ तुम वक्त रहते हीII
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